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Sandhi Vichchhed (संधि एवं संधि के भेद)

नमस्कार विद्यार्थियों Sandhi Vichchhed हिंदी का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, एवं जैसा कि आप लोग जानते हैं कि संधि से कई प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं, इसलिए हमारा आज का topic sandhi viched in hindi है जिसे हमने कम से कम शब्दों में अच्छी प्रकार समझाने का प्रयास किया है | जो भी विद्यार्थी UPPSC की प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह topic अत्यंत महत्वपूर्ण है |

Sandhi Vichchhed (संधि एवं संधि के भेद)

Sandhi Vichchhed (संधि एवं संधि के भेद)

संधि किसे कहते हैं? (Sandhi kise kahate hain)

संधि का अर्थ (Sandhi in Hindi) : ‘संधि’ संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है – ‘मेल’। दो वर्णों के मेल या जोड़ को ही संधि कहते हैं |

संधि की परिभाषा (Sandhi ki paribhasha)

दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार (अर्थात परिवर्तन) को संधि कहते हैं।

उदहारण के लिए

भानु + उदय= भानूदय
महा + ऊर्मि = महोर्मि
विद्या + अर्थी = विद्यार्थी

संधि-विच्छेद (Sandhi vichchhed)

संधि के नियमों द्वारा मिले वर्णों को फिर उनकी पहली स्थिति में पहुँचा दिया जाना (वर्णों को अलग-अलग कर देना) संधि विच्छेद कहलाता है।

उदहारण के लिए

विद्यार्थी = विद्या + अर्थी
गजानन = गज + आनन

संधि के भेद (Sandhi ke bhed)

संधि के तीन भेद माने जाते हैं-

1. स्वर संधि
2. व्यंजन संधि
3. विसर्ग संधि

1. स्वर संधि

स्वर के साथ स्वर का मेल होने से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं|

जैसे —
पर + उपकार = परोपकार
पुस्तक + आलय = पुस्तकालय

स्वर संधि के पाँच भेद होते हैं।

स्वर संधि के भेद :

(i) दीर्घ संधि

जब ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ से परे क्रमशः ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, आएँ तो दोनों के मेल से दीर्घ आ, ई और ऊ हो जाते हैं। उसे दीर्घ संधि कहते हैं |
आ + अ = आ
अ + अ = आ
अ + आ = आ
आ + आ = आ
इ + इ = ई
इ + ई = ई
ई + ई = ई
ई + इ = ई
उ + उ = ऊ
उ + ऊ = ऊ
ऊ + उ = ऊ
ऊ + ऊ = ऊ

जैसे —
आ + अ = आ ⇒ विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
उ + उ = ऊ  ⇒  सु + उक्ति = सूक्ति

(ii) गुण संधि

जब अ या आ के आगे इ, ई, उ, ऊ और ऋ स्वर आते हैं तो इनके परस्पर मेल से क्रमशः ए, ओ और अर बन जाता है। इस मेल को गुण संधि कहते हैं |
अ + इ =ए
अ + ई =ए
आ + इ = ए
आ + ई = ए
अ + उ =ओ
अ + ऊ =ओ
आ+ उ = ओ
आ+ ऊ = ओ
अ + ऋ = अर्
आ + ऋ = अर्

जैसे —
आ + ई= ए  ⇒  महा + ईश = महेश
अ + ऊ = ओ  ⇒  जल + ऊर्मि = जलोर्मि
आ + ऋ = अर्  ⇒  महा + ऋषि = महर्षि

(iii) वृधि संधि

जब अ या आ के बाद ए या ऐ हो तो दोनों के स्थान पर ऐ, यदि ओ या औ हो तो दोनों के स्थान पर औ हो जाता है। इसे वृधि संधि कहते हैं;
अ+ ए = ऐ
अ+ ऐ = ऐ
आ+ ए =ऐ
आ+ ऐ =ऐ
अ+ ओ =औ
अ+ औ =औ
आ+ओ =औ
आ+ औ =औ

जैसे —
अ + औ = औ  ⇒  परम + औषध = परमौषध
आ + ऐ = ऐ  ⇒  महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य

(iv) यण संधि

जब इ या ई के बाद इ वर्ण के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर आता है, तो इ-ई के स्थान पर ‘य्‘ और यदि उ या ऊ के बाद उ वर्ण के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर आता है, तो उ या ऊ का ‘व्‘ तथा ऋ के अतिरिक्त कोई भिन्न स्वर आता है, तो ऋ का ‘र्‘ हो जाता है|

जैसे —
इ + अ = य्  ⇒  यदि + अपि = यद्यपि
ई + आ = या  ⇒  देवी + आगम = देव्यागम

(v) अयादि संधि

ए या ऐ के बाद ए वर्ण के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर आता है, तो ए का ‘अय्‘ तथा ऐ का ‘आय्‘ हो जाता है। यदि ओ या औ के बाद ओ वर्ण के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर आता है, तो ओ का अव् तथा औ का आव् हो जाता है। इसे अयादि संधि कहते हैं |

जैसे —
ऐ + अ = आय् + अ  ⇒  गै + अक = गायक
औ + इ = आव् + इ  ⇒  नौ + इक = नाविक

2. व्यंजन संधि

व्यंजन के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने से उस व्यंजन में जो परिवर्तन होता है, वह ‘व्यंजन संधि’ कहलाता है |

जैसे —
जगत् + नाथ = जगन्नाथ
सत् + चरित्र = सच्चरित्र

3. विसर्ग संधि

विसर्ग के बाद स्वर अथवा व्यंजन के आने से विसर्ग में जो परिवर्तन होता है, वह विसर्ग संधि कहलाता है |

जैसे —
नि: + छल = निश्छल
बहि: + मुख = बहिर्मुख

ऐसे विद्यार्थी जो Sandhi Vichchhed (संधि एवं संधि के भेद), Sandhi Vichchhed in Hindi, Sandhi Vichchhed ke Prakar आदि प्रकार के प्रश्नों की खोज कर रहे हैं उनके लिए हमारा यह topic अवश्य पढना चाहिए |

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